श्रद्धा कासकर कोली स्त्री हैं। एक शिक्षिका रही हैं और आज यह इंस्टाग्राम पर अपने पेज “कोलीयांची सुन” को लेकर बहुत चर्चा में भी हैं। श्रद्धा एक सामाजिक महिला हैं और इन पर अपने समाज की कन्याओं को मुख्य धारा में शामिल करने का जुनून सवार है। बड़ी होकर हमारी लड़कियां कुछ नाम कमाये, कोली समाज का भी हर क्षेत्र में नाम हो, ऐसा चाहती हैं श्रद्धा कासकर। और यह सब सिर्फ जुमला नहीं है, ना ही सपना। इसके लिए श्रद्धा ने अपनी टीचरी छोड़ दी। अब वह फुल टाइम सोशल वर्कर हैं।
दो वर्ष पूर्व श्रद्धा योगेश कासकर ने एक प्रयोग के तौर पर अपना इंस्टाग्राम पेज खोला था। पेज का शीर्षक “कोलीयांची सुन” बड़े काम का निकला। कोली समाज की ओर से अच्छा रिस्पॉन्स मिला। फिर श्रद्धा को भी गति मिल गई। उसने यह पेज कोली कन्याओं के लिए समर्पित कर दिया। अब पॉडकास्ट शुरू करने की तैयारी है। श्रद्धा को विश्वास है वह कोली समाज की, लड़कियों की आवाज़ बनेगी और उन्हें उनके मुकाम पर पहुंचाएंगी।
श्रद्धा नहीं चाहती कि कोली युवतियां मछली बाजार के पिंजरे में कैद रहें। श्रद्धा चाहती है कि समाज के अन्य वर्गों की युवतियों की तरह कोली बहनें भी विकास की मुख्य धारा से जुड़ें । ऐसा भी नहीं है कि कोली समाज में पढ़े लिखे लोग नहीं हैं, बहुत हैं पर उनको कोई जानता नहीं। श्रद्धा चाहती हैं कि कोली समाज के ऊपर मच्छीमार के लेबल को उखाड़कर कुछ और भी लिखा जाए। हर क्षेत्र में कोली लड़कियों का जलवा कायम हो।
“कोलीयांची सुन” कोली कन्याओं के मुख्य धारा से जोड़ने का एक प्लेटफार्म है — श्रद्धा कासकर


